सुलतानपुर: सुलतानपुर जिले से एक बेहद भावुक और दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां प्रेमिका की मौत से आहत एक युवक ने आत्महत्या कर ली। सुसाइड से पहले उसने एक नोट भी लिखा, जिसमें भावुक शब्दों में अपनी बेबसी और दर्द बयां किया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, युवक और युवती पिछले कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों के बीच गहरा प्रेम संबंध था। कुछ दिन पहले युवती की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रेमिका की मौत की खबर सुनते ही युवक सदमे में चला गया।
परिजनों के मुताबिक, युवती के अंतिम संस्कार के बाद से ही युवक गुमसुम रहने लगा था। वह बार-बार यही कहता था कि “अब जीने का कोई मतलब नहीं रह गया।”
सुसाइड नोट में क्या लिखा?
आत्महत्या से पहले युवक ने एक सुसाइड नोट छोड़ा। उसमें लिखा था—
“मेरी जान ही नहीं रही तो जी के क्या करूंगा। मैं उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता। हमें साथ जीने नहीं दिया गया, तो कम से कम हमें साथ दफना देना।”
यह नोट पढ़कर परिवार और आसपास के लोग स्तब्ध रह गए।
कैसे दी जान?
बताया जा रहा है कि युवक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को शक हुआ। दरवाजा तोड़कर अंदर देखा तो युवक का शव फंदे से लटका मिला। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने सुसाइड नोट भी बरामद कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है।
साथ दफनाए गए प्रेमी-प्रेमिका
युवक की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए, परिजनों और गांव के लोगों की सहमति से दोनों को एक ही कब्रिस्तान में पास-पास दफनाया गया। इस दृश्य को देखकर पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग अंतिम विदाई देने पहुंचे।
इलाके में चर्चा का विषय
यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इस प्रेम कहानी को एक दर्दनाक अंत के रूप में देख रहे हैं। वहीं मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि किसी प्रियजन की अचानक मौत गहरे मानसिक आघात का कारण बन सकती है, ऐसे समय में परिवार और दोस्तों का साथ बेहद जरूरी होता है।
यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो नजदीकी परामर्श केंद्र या हेल्पलाइन से संपर्क जरूर करें। कठिन समय में मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है।
