मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। खबर है कि चीन से दो जहाज ऐसे सामान के साथ रवाना हुए हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल बनाने में किया जा सकता है। यह जहाज ईरान की ओर जा रहे हैं। इस खबर के सामने आने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इन जहाजों में मिसाइल तकनीक से जुड़ी मशीनरी, विशेष धातु और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हो सकते हैं। माना जा रहा है कि ये सामग्री ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को मजबूत करने में मदद कर सकती है।
जिनपिंग ईरान की मदद क्यों कर रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग की सरकार ईरान के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहती है। चीन पहले से ही ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग भी बढ़ रहा है।
चीन के लिए ईरान मध्य-पूर्व में एक अहम साझेदार माना जाता है, जबकि ईरान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच चीन का समर्थन मिल जाता है।
अमेरिका की चिंता क्यों बढ़ी?
अमेरिका और उसके सहयोगी लंबे समय से ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित रहे हैं। वॉशिंगटन का मानना है कि अगर ईरान को उन्नत तकनीक मिलती है तो क्षेत्र में सैन्य संतुलन बिगड़ सकता है।
अमेरिका पहले भी कई बार ईरान पर प्रतिबंध लगा चुका है और उसके हथियार कार्यक्रम को रोकने की कोशिश करता रहा है।
क्या अमेरिका रास्ते में ही जहाजों पर हमला कर सकता है?
सैद्धांतिक रूप से अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निगरानी रखता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई कर सकता है। लेकिन किसी दूसरे देश के जहाज पर सीधे हमला करना बहुत बड़ा सैन्य और कूटनीतिक कदम होगा।
ऐसी स्थिति में चीन और अमेरिका के बीच तनाव गंभीर स्तर तक पहुंच सकता है, इसलिए आमतौर पर पहले कूटनीतिक दबाव, जांच या प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जाते हैं।
बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
अगर इन जहाजों में वास्तव में मिसाइल से जुड़ा सामान है और वह ईरान तक पहुंच जाता है, तो मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है। चीन, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
