राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने पद और संघ की परंपराओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि संघ कहेगा तो वे बिना किसी हिचक के सरसंघचालक का पद छोड़ देंगे। भागवत ने स्पष्ट किया कि RSS में पद व्यक्ति से बड़ा नहीं होता, बल्कि संगठन और उसकी विचारधारा सर्वोपरि रहती है।
भागवत ने यह भी कहा कि RSS प्रमुख बनने के लिए किसी खास परिवार या पृष्ठभूमि की आवश्यकता नहीं होती। कोई भी हिंदू, जो संघ की विचारधारा और अनुशासन को अपनाता है, संघ प्रमुख बन सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि संघ में नेतृत्व चयन योग्यता और समर्पण के आधार पर होता है, न कि किसी विशेष पहचान पर।
वीर सावरकर को भारत रत्न देने के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि यदि सावरकर को यह सम्मान दिया जाता है तो इससे भारत रत्न की गरिमा और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सावरकर का योगदान देश की आज़ादी और राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
भागवत के इस बयान को संघ की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रवादी विमर्श के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
