लुधियाना (पंजाब)। पंजाब में बढ़ते नशे के संकट के बीच अब धार्मिक संगठनों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। Nihang समुदाय ने लुधियाना जिले के ग्रामीण इलाकों में “चिट्टा मुक्त गांव” अभियान की शुरुआत की है। इस मुहिम का मकसद युवाओं को नशे से दूर रखना और गांव स्तर पर नशा बेचने वालों के खिलाफ सामाजिक दबाव बनाना है।
क्या है ‘चिट्टा मुक्त गांव’ फार्मूला?
निहंगों ने अपने अभियान का एक स्पष्ट फार्मूला बताया है—
- पहला चरण – समझाइश:
गांव में जिन लोगों पर नशा बेचने या सेवन करने का संदेह है, उनके घर जाकर हाथ जोड़कर अपील की जाएगी कि वे यह काम छोड़ दें। - दूसरा चरण – चेतावनी:
अगर कोई व्यक्ति नहीं मानता, तो उसे समाज और पंचायत के सामने चेतावनी दी जाएगी। - तीसरा चरण – पुलिस कार्रवाई:
फिर भी सुधार नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति की सूचना पुलिस को दी जाएगी। - चौथा चरण – सख्ती:
निहंगों का कहना है कि यदि इसके बावजूद भी अवैध धंधा जारी रहा, तो वे सामूहिक रूप से दबाव बनाकर यह काम बंद करवाएंगे।
गांव-गांव पहुंचने की तैयारी
अभियान की शुरुआत लुधियाना के कुछ गांवों से की गई है। निहंगों की टीमें मोटरसाइकिल और वाहनों के काफिले के साथ गांवों में पहुंच रही हैं। गुरुद्वारों में बैठकें कर युवाओं और बुजुर्गों से नशे के खिलाफ एकजुट होने की अपील की जा रही है।
नशे पर सख्त संदेश
निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि “चिट्टा” यानी सिंथेटिक ड्रग्स ने पंजाब की युवा पीढ़ी को बर्बाद कर दिया है। उनका दावा है कि यदि समाज खुद खड़ा हो जाए, तो नशा बेचने वालों की हिम्मत टूट जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य कानून हाथ में लेना नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता फैलाना है।
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करी के खिलाफ पहले से अभियान चल रहा है। यदि किसी के पास ठोस सूचना है, तो वह पुलिस के साथ साझा करे। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सामाजिक समर्थन
कई ग्रामीणों ने इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि गांव स्तर पर निगरानी बढ़ेगी तो बाहरी तस्करों के लिए जगह बनाना मुश्किल होगा। हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि किसी भी कार्रवाई में कानून की मर्यादा का पालन जरूरी है।
