नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पेश किया है, जिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाई जा रही और उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा।
इससे पहले दिन में लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार और स्पीकर के फैसलों पर सवाल उठाए, जिसके चलते सदन में शोरगुल बढ़ गया। हालात को देखते हुए स्पीकर ने पहले कुछ समय के लिए और बाद में दोपहर तक कार्यवाही स्थगित कर दी।
दोपहर बाद जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो सरकार ने बजट पर चर्चा आगे बढ़ाई। वित्त मंत्री और सत्तापक्ष के सांसदों ने बजट को विकासोन्मुखी बताते हुए अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। वहीं विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक योजनाओं के बजट आवंटन पर सवाल उठाए।
अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को लेकर अब सबकी नजर स्पीकर के फैसले पर टिकी है। संसदीय नियमों के तहत स्पीकर यह तय करेंगे कि प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर सियासी टकराव और तेज हो सकता है।
फिलहाल बजट पर चर्चा जारी है, लेकिन विपक्ष के रुख को देखते हुए सत्र के शेष दिनों में भी हंगामे के आसार बने हुए हैं।
