गाजा में जारी संघर्ष के बीच इजराइल पर प्रतिबंधित बताए जा रहे “वैक्यूम बम” (थर्मोबारिक हथियार) के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय स्रोतों के हवाले से दावा किया गया है कि इन बमों के विस्फोट के दौरान तापमान 3,000 से 3,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे भारी तबाही होती है। हालांकि इजराइली अधिकारियों की ओर से ऐसे आरोपों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्या होते हैं वैक्यूम बम?
वैक्यूम बम, जिन्हें थर्मोबारिक हथियार भी कहा जाता है, विस्फोट के समय आसपास की हवा (ऑक्सीजन) को खींचकर अत्यधिक तीव्र दबाव और तापमान पैदा करते हैं। इससे विस्फोट क्षेत्र में मौजूद संरचनाएं ध्वस्त हो सकती हैं और गंभीर जनहानि होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इनका असर पारंपरिक बमों की तुलना में अधिक व्यापक और घातक हो सकता है, खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में।
मानवीय संगठनों की चिंता
मानवाधिकार संगठनों ने गाजा में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल हुआ है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है ताकि तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
जमीन पर हालात
गाजा में जारी हमलों के कारण पहले ही हजारों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने की खबरें हैं। अस्पतालों और राहत शिविरों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कई इलाकों में बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव
इजराइल की सरकार ने बार-बार कहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई हमास के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित तौर पर जिन हथियारों के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, वे वास्तव में उपयोग में लाए गए थे या नहीं। फिलहाल गाजा में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और विश्व समुदाय की नजरें इस संघर्ष पर टिकी हैं।
