भारत के Supreme Court of India ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण था। कोर्ट ने साफ कहा कि महिला अधिकारी भी पुरुषों के समान अधिकार रखती हैं और उन्हें समान अवसर मिलना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक महिला सेना अधिकारी का था, जो पिछले 23 साल से स्थायी कमीशन पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। उन्हें शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में स्थायी कमीशन देने से मना कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा:
- महिला और पुरुष अधिकारियों के बीच भेदभाव संविधान के खिलाफ है
- सेना में महिलाओं की भूमिका को कम आंकना गलत है
- समान काम के लिए समान अधिकार जरूरी है
🪖 क्या होता है स्थायी कमीशन?
स्थायी कमीशन का मतलब है कि अधिकारी सेना में रिटायरमेंट तक सेवा दे सकता है, जबकि शॉर्ट सर्विस कमीशन में सेवा सीमित समय के लिए होती है।
फैसले का असर
- अब महिलाओं को सेना में लंबे समय तक सेवा का अवसर मिलेगा
- प्रमोशन और करियर ग्रोथ के रास्ते खुलेंगे
- यह फैसला लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है
पहले भी आया था बड़ा फैसला
इससे पहले भी Supreme Court of India ने 2020 में महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन देने के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिससे कई महिला अधिकारियों को लाभ मिला था।
यह फैसला सिर्फ एक अधिकारी की जीत नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के अधिकारों की जीत माना जा रहा है।
