चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी खातों से जुड़े लगभग ₹590 करोड़ के बड़े बैंक फ्रॉड मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में हरियाणा के दो अधिकारियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि बैंक मैनेजर और कुछ बाहरी लोगों के साथ मिलकर सरकारी विभागों का पैसा फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कराया गया।
क्या है पूरा मामला
जांच के अनुसार, यह घोटाला चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक की एक शाखा से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने मिलकर सरकारी विभागों के बैंक खातों से अवैध तरीके से पैसा निकालकर शेल (नकली) कंपनियों में भेज दिया।
ऐसे हुआ फ्रॉड
- सरकारी विभागों के कई बैंक खाते IDFC बैंक में थे।
- आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया।
- इसके बाद पैसा अलग-अलग फर्जी कंपनियों और निजी खातों में ट्रांसफर किया गया।
- जांच में कई कंपनियों के नाम सामने आए जैसे RS Traders, Capco Fintech Services और Swastik Desh Project।
कितने लोग गिरफ्तार
अब तक इस मामले में 11 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें
- बैंक कर्मचारी
- निजी कारोबारी
- और कुछ सरकारी अधिकारी शामिल हैं।
100 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज
जांच एजेंसियों ने 100 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और कई जगहों पर छापेमारी की गई है। अधिकारियों ने कई मोबाइल, लैपटॉप और लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
इस मामले की जांच हरियाणा स्टेट विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) और अन्य एजेंसियां कर रही हैं। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) भी गठित की है।
👉 शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि सरकारी योजनाओं और विभागों के पैसे को बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से नकली कंपनियों में भेजकर हड़पने की साजिश रची गई थी।
