चंडीगढ़/हरियाणा:
हरियाणा में करीब ₹590 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अगुवाई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Arun Gupta करेंगे। आरोप है कि विभिन्न सरकारी विभागों के अकाउंट से बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी की गई।
क्या है पूरा मामला?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ विभागों के बैंक खातों से संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुए। बताया जा रहा है कि:
- फर्जी बिल और वाउचर के जरिए रकम निकाली गई
- अकाउंटिंग सिस्टम में तकनीकी खामियों का फायदा उठाया गया
- कुछ भुगतान बिना वैध स्वीकृति के जारी किए गए
सूत्रों के मुताबिक, यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी, लेकिन हाल ही में ऑडिट के दौरान मामला उजागर हुआ।
जांच कमेटी के जिम्मे क्या-क्या?
सरकार द्वारा गठित कमेटी को निम्न बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए गए हैं:
- किन-किन विभागों से कितनी राशि निकाली गई
- क्या इसमें अंदरूनी अधिकारियों/कर्मचारियों की संलिप्तता है
- बैंकिंग और ट्रेजरी सिस्टम में कहां चूक हुई
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं
कमेटी अपनी रिपोर्ट तय समय सीमा में सरकार को सौंपेगी। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
सरकार का बयान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। वित्त विभाग के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है और सभी विभागों के खातों का विशेष ऑडिट शुरू कर दिया गया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि की हेराफेरी बिना उच्च स्तर की जानकारी के संभव नहीं है। मामले की पारदर्शी जांच और दोषियों की सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की गई है।
आगे क्या?
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला केवल वित्तीय लापरवाही है या फिर संगठित घोटाले का हिस्सा। फिलहाल पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मची हुई है।
