लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि बहुजन समाज पार्टी से उनका “पुराना रिश्ता” रहा है और भविष्य में भी मुद्दों के आधार पर साथ काम करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी बीच पूर्व बसपा नेता Naseemuddin Siddiqui को औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई गई, जिससे प्रदेश की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विचारधारा और सामाजिक न्याय के सवाल पर जो भी दल साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता समय की मांग है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने बसपा प्रमुख Mayawati को भी किसी तरह का प्रस्ताव दिया है, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से परहेज किया और कहा कि “राजनीति में संवाद के दरवाजे कभी बंद नहीं होते।”
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में शामिल होने को राजनीतिक जानकार दलित-मुस्लिम समीकरण के लिहाज से अहम मान रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे सपा अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं बसपा की ओर से अभी तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा-बसपा के रिश्ते कभी दोस्ती तो कभी तीखी प्रतिद्वंद्विता के रहे हैं। ऐसे में अखिलेश के ताजा बयान ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले चुनावों से पहले नई राजनीतिक संभावनाएं बन सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या मायावती की ओर से भी कोई संकेत मिलता है या यह केवल रणनीतिक बयानबाजी है।
