कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सिपाही और दरोगा पर आरोप है कि उन्होंने नशे के कारोबारियों से मिलकर चरस और गांजा की तस्करी करवाई और इसके बदले करीब 100 करोड़ रुपये तक की अवैध कमाई की। जांच के दौरान पुलिस को दोनों के बीच हुई बातचीत के ऑडियो रिकॉर्डिंग और चैट भी मिली हैं, जिनसे पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी पुलिसकर्मी तस्करों को छापेमारी से पहले ही इशारा कर देते थे। वे सीधे फोन करने के बजाय व्हाट्सएप पर इमोजी भेजकर संकेत देते थे कि पुलिस रेड होने वाली है। जैसे ही तस्करों को यह इशारा मिलता, वे तुरंत अपना माल और ठिकाना बदल देते थे।
सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए कई सालों से कानपुर और आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर चरस-गांजा की सप्लाई की जा रही थी। बदले में तस्कर पुलिसकर्मियों को मोटी रकम देते थे। जांच में सामने आया कि इस अवैध कारोबार से आरोपियों ने लगभग 100 करोड़ रुपये तक की संपत्ति और नकदी इकट्ठा कर ली।
मामला तब उजागर हुआ जब पुलिस को कुछ संदिग्ध कॉल और चैट की जानकारी मिली। इसके बाद जांच एजेंसियों ने ऑडियो रिकॉर्डिंग और मोबाइल डेटा खंगाला, जिसमें दरोगा और सिपाही की तस्करों से बातचीत के कई सबूत सामने आए। ऑडियो में छापेमारी से पहले सूचना देने और पैसे के लेन-देन की बात भी सुनाई दे रही है।
फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ नारकोटिक्स और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी।
