अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दुनियाभर के देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब महज तीन घंटे पहले Supreme Court of the United States ने टैरिफ से जुड़े एक आदेश को रद्द कर दिया था।
ट्रम्प ने अपने बयान में न्यायपालिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “कुछ जज देश के लिए कलंक हैं” और वे अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी प्राथमिकता “अमेरिका फर्स्ट” नीति है और अमेरिकी उद्योगों व श्रमिकों की रक्षा के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।
क्या है 10% ग्लोबल टैरिफ?
इस फैसले के तहत अमेरिका में आयात होने वाले अधिकांश विदेशी उत्पादों पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। ट्रम्प का दावा है कि इससे:
- घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा
- स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी
- विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ से जुड़े प्रावधानों को कानूनी आधार पर चुनौती देते हुए रद्द किया था। कोर्ट का मानना था कि ऐसे व्यापक आर्थिक फैसले के लिए स्पष्ट संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। हालांकि, ट्रम्प की नई घोषणा से कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ट्रम्प के इस कदम से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। कई देशों ने संभावित जवाबी टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव और व्यापार युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
राजनीतिक असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम ट्रम्प के समर्थकों को मजबूत संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह फैसला अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ा सकता है।
