झारखंड के लातेहार जिले की एक साधारण-सी गांव की महिला आज असाधारण पहचान बना चुकी हैं। सिबलिन बाड़ा, जिन्हें लोग प्यार से “ड्रैगन लेडी” कहने लगे हैं, ने ड्रैगन फ्रूट की खेती के जरिए न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
कभी परंपरागत खेती पर निर्भर सिबलिन बाड़ा को कम आमदनी और मौसम की मार से लगातार संघर्ष करना पड़ता था। परिवार की जरूरतें बढ़ रही थीं, लेकिन आम फसलों से खर्च निकाल पाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे समय में उन्होंने कुछ नया करने का साहस दिखाया। कृषि विभाग और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में जानकारी मिली। यह फसल झारखंड की जलवायु के लिए अनुकूल थी और बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ रही थी।
शुरुआत आसान नहीं थी। गांव में लोगों ने पहले इस अनोखी फसल पर भरोसा नहीं किया। कांटेदार पौधों और अजीब नाम वाली खेती को लेकर कई सवाल उठे। लेकिन सिबलिन बाड़ा ने हार नहीं मानी। उन्होंने थोड़ी-सी जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की, वैज्ञानिक तरीके अपनाए और नियमित देखभाल की। मेहनत रंग लाई और कुछ ही समय में पौधों पर आकर्षक गुलाबी फल लटकने लगे।
पहली ही फसल से उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा मुनाफा हुआ। बाजार में ड्रैगन फ्रूट अच्छे दाम पर बिकने लगा और उनकी आमदनी कई गुना बढ़ गई। आज सिबलिन बाड़ा सालाना अच्छी आय अर्जित कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। यही नहीं, उन्होंने अपने अनुभव गांव की अन्य महिलाओं और किसानों के साथ भी साझा किए।
आज उनके गांव में कई किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती अपना रहे हैं। महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से खेती, पैकेजिंग और बिक्री में जुड़ रही हैं। इससे गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और पलायन भी कम हुआ है। सिबलिन बाड़ा अब सिर्फ किसान नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और नेतृत्वकर्ता बन चुकी हैं।
उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही जानकारी, मेहनत और आत्मविश्वास से ग्रामीण महिलाएं भी बदलाव की अगुआ बन सकती हैं। “ड्रैगन लेडी” के नाम से मशहूर सिबलिन बाड़ा आज लातेहार ही नहीं, पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और नवाचार की मिसाल बन गई हैं।
