कुरुक्षेत्र। देशी नस्लों के संरक्षण और उत्कृष्ट पशुधन के प्रदर्शन के लिए मशहूर कुरुक्षेत्र पशु मेले में इस बार थारपारकर नस्ल का सांड ‘चांद’ लोगों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है। करीब 800 किलो वजन वाले ‘चांद’ की कद-काठी, चमकदार सफेद रंग और शांत स्वभाव ने दर्शकों को हैरान कर दिया। खास बात यह है कि ‘चांद’ को हलवा-पूरी बेहद पसंद है, जिसे उसके मालिक विशेष अवसरों पर खिलाते हैं।
मालिक के अनुसार ‘चांद’ अब तक 5 बार चैंपियन रह चुका है। थारपारकर नस्ल की खासियत—रेगिस्तान की तेज गर्मी और कड़ाके की सर्दी में भी सहज अनुकूलन—इस सांड में साफ दिखती है। कठिन मौसम में भी इसकी सेहत और ऊर्जा पर कोई असर नहीं पड़ता, यही वजह है कि यह नस्ल दूध, ताकत और सहनशक्ति के लिए जानी जाती है।
पशु मेले में आए विशेषज्ञों का कहना है कि थारपारकर जैसी देशी नस्लें कम देखभाल में बेहतर प्रदर्शन करती हैं और जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं। ‘चांद’ न सिर्फ नस्ल की श्रेष्ठता का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सही पालन-पोषण और पोषण से देशी पशुधन अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान बना सकता है।
मेले में ‘चांद’ के साथ फोटो खिंचवाने और जानकारी लेने वालों की भीड़ लगी हुई है। आयोजकों का कहना है कि ऐसे पशु युवाओं और किसानों को देशी नस्लों के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं।
