नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई हालिया ट्रेड डील को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते की जमीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की बैकडोर बातचीत में तैयार हुई थी। बताया जा रहा है कि डोभाल ने अमेरिकी पक्ष को साफ संदेश दिया था कि भारत किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और यदि जरूरत पड़ी तो तत्काल समझौते के बजाय समय का इंतजार करेगा।
दावे के अनुसार, डोभाल ने विदेश मंत्री को भी यह भरोसा दिलाया था कि भारत की रणनीति लंबी अवधि की है। उन्होंने कहा था कि यदि तत्काल राजनीतिक हालात भारत के हित में नहीं हैं, तो ट्रम्प प्रशासन के हटने तक भी इंतजार किया जा सकता है। भारत की प्राथमिकता आत्मसम्मान और रणनीतिक स्वायत्तता है, न कि जल्दबाजी में किया गया कोई समझौता।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआती दौर में अमेरिका की ओर से कुछ शर्तों पर कड़ा रुख अपनाया गया था, खासकर टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर। लेकिन बैकडोर स्तर पर हुई बातचीत में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू बाजार के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। इसी सख्त रुख के बाद अमेरिका को अपने रुख में नरमी लानी पड़ी।
अंततः बदले हुए वैश्विक हालात और रणनीतिक साझेदारी की जरूरत को देखते हुए दोनों देशों के बीच ट्रेड डील का रास्ता साफ हुआ। जानकारों का मानना है कि यह डील सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन का भी नतीजा है, जिसमें भारत ने दबाव में आए बिना अपने हित सुरक्षित रखे।
हालांकि सरकार की ओर से इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में इसे भारत की मजबूत सौदेबाजी क्षमता और आत्मविश्वासी विदेश नीति का उदाहरण माना जा रहा है।
