चंडीगढ़/पंजाब। फरवरी महीने में पंजाब में इस बार बारिश ने लगभग पूरी तरह से साथ छोड़ दिया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सामान्य औसत की तुलना में करीब 98% कम वर्षा दर्ज की गई। कई जिलों में तो पूरे महीने एक बूंद भी बारिश नहीं हुई, जिससे खेती और मौसम दोनों पर असर साफ दिखाई दे रहा है।
4 जिलों में बिल्कुल नहीं हुई बारिश
राज्य के चार जिलों में फरवरी के दौरान शून्य वर्षा (0 mm) दर्ज की गई। अन्य अधिकांश जिलों में भी सामान्य से बेहद कम बारिश हुई। इससे गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
चंडीगढ़ में 95% कम वर्षा
संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में भी हालात अलग नहीं रहे। यहां फरवरी में सामान्य से करीब 95% कम बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय न होने के कारण बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं।
तापमान सामान्य से 4.7 डिग्री अधिक
बारिश की कमी का सीधा असर तापमान पर पड़ा है। प्रदेश में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 4.7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और रात में भी अपेक्षाकृत गर्मी महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मार्च के शुरुआती दिनों में भी बारिश नहीं होती है तो गर्मी समय से पहले दस्तक दे सकती है, जिससे फसलों की पैदावार प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाएगी।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश न होने से किसानों को सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों की नियमित निगरानी करें और आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन करें।
आगे का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि हल्के पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
फिलहाल, फरवरी की यह सूखी तस्वीर पंजाब में बढ़ती गर्मी और कृषि संकट की ओर इशारा कर रही है।
