छपरा (बिहार) से प्रेरणादायक कहानी
बिहार के छपरा जिले की रहने वाली सरिता देवी की कहानी आज लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कभी गरीबी और मजबूरी में बकरी चराने वाली सरिता आज एक सफल व्यवसायी बन गई हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि गांव की कई महिलाओं को भी रोजगार का रास्ता दिखाया।
बचपन में गरीबी, बकरी चराकर गुजारा
सरिता बताती हैं कि उनका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उन्हें पढ़ाई छोड़कर बकरी चरानी पड़ी। घर चलाने के लिए छोटे-छोटे काम करने पड़ते थे।
सिलाई-कढ़ाई से बदली जिंदगी
समय के साथ सरिता ने हार नहीं मानी और “जीविका” समूह से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। शुरुआत में उन्होंने घर से ही छोटे-छोटे ऑर्डर लेने शुरू किए। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और काम बढ़ता गया।
आज 1 लाख की दुकान की मालकिन
आज सरिता की अपनी दुकान है, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपये बताई जाती है। उनकी दुकान पर महिलाओं के कपड़े, कढ़ाई के डिजाइन और सिलाई का काम किया जाता है। गांव के लोग अब उन्हें एक सफल उद्यमी के रूप में जानते हैं।
कई महिलाओं को दिया रोजगार
सरिता अब सिर्फ खुद ही नहीं कमा रहीं, बल्कि उन्होंने अपने साथ कई अन्य महिलाओं को भी जोड़ लिया है। उनके जरिए गांव की कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की मदद कर रही हैं।
सरिता की सीख
सरिता कहती हैं,
“अगर मन में कुछ करने की चाह हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती।”
मिसाल बनीं “जीविका दीदी”
सरिता आज “जीविका दीदी” के नाम से जानी जाती हैं और उनकी सफलता की कहानी सरकार की योजनाओं के सही इस्तेमाल का एक बेहतरीन उदाहरण है।
