एक छोटे शहर में रहने वाले एक परिवार ने आरोप लगाया है कि स्थानीय स्तर पर बढ़े तनाव और कथित धमकियों के चलते उनकी नाबालिग बेटी को स्कूल जाना बंद करना पड़ा। परिवार का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों से वे भय के माहौल में जी रहे हैं, जिस वजह से रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है।
परिजनों के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा की गई कथित पूछताछ और दबाव के बाद उन्होंने एहतियातन बच्ची को स्कूल भेजना बंद कर दिया। मां ने बताया, “हमें डर है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। बच्ची पढ़ना चाहती है, लेकिन सुरक्षा हमारी पहली चिंता है।”
हालांकि, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं मिली है। एक अधिकारी ने बताया कि यदि परिवार लिखित शिकायत देता है तो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, बजरंग दल से जुड़े कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संगठन किसी भी तरह की धमकी या दबाव का समर्थन नहीं करता। उनका कहना है कि बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि बच्चों की शिक्षा किसी भी विवाद से ऊपर होनी चाहिए और ऐसे मामलों में प्रशासन को त्वरित कदम उठाने चाहिए ताकि परिवार निडर होकर सामान्य जीवन जी सके।
