हरियाणा में मेडिकल स्टूडेंट्स की बॉन्ड पॉलिसी को लेकर नया विवाद सामने आया है। रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन Federation of Resident Doctors’ Association (FORDA) ने इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से समर्थन जताते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट नीति लाने की मांग की है। FORDA ने विशेष रूप से Directorate of Medical Education and Research (DMER) से बॉन्ड शर्तों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है, ताकि छात्रों के बीच फैली भ्रम की स्थिति दूर की जा सके।
संगठन का कहना है कि वर्तमान बॉन्ड अवधि और उससे जुड़ी शर्तें छात्रों के लिए मानसिक, आर्थिक और पेशेवर दबाव बढ़ा रही हैं। FORDA ने हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini से अपील की है कि मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए बॉन्ड अवधि को घटाकर 1 वर्ष किया जाए, जिससे युवाओं को राहत मिल सके और स्वास्थ्य सेवाओं में भी संतुलन बना रहे।
FORDA के प्रतिनिधियों का कहना है कि डॉक्टर बनने में पहले ही कई वर्ष की कठिन पढ़ाई और प्रशिक्षण शामिल होता है। लंबी बॉन्ड अवधि के कारण कई छात्रों को आगे की पढ़ाई या निजी क्षेत्र में अवसर लेने में बाधा आती है। संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा सुनिश्चित करना चाहती है, तो इसके लिए प्रोत्साहन आधारित मॉडल अपनाया जाए, न कि कठोर दंडात्मक शर्तें लागू की जाएं।
इस मुद्दे को लेकर राज्य के मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों में चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर हरियाणा सरकार और DMER के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी है, जिससे आने वाले समय में बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव की दिशा स्पष्ट हो सके।
