लंदन। ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता और वर्तमान में सरकार में अहम भूमिका निभा रहीं शबाना महमूद को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि वे देश की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं। कश्मीरी मूल की शबाना महमूद का नाम उस वक्त मजबूती से उभर रहा है, जब प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर एपस्टीन फाइल्स से जुड़े विवाद के कारण भारी राजनीतिक दबाव में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एपस्टीन फाइल्स को लेकर सामने आए नए दस्तावेजों और विपक्ष के लगातार हमलों से PM स्टार्मर की साख को नुकसान पहुंचा है। लेबर पार्टी के भीतर भी नेतृत्व को लेकर असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के संभावित विकल्पों पर मंथन शुरू हो गया है, जिसमें शबाना महमूद एक मजबूत दावेदार के रूप में सामने आई हैं।
कश्मीरी मूल से ब्रिटेन की राजनीति तक
शबाना महमूद का परिवार कश्मीरी मूल का है। वे ब्रिटेन में जन्मी और पली-बढ़ी हैं तथा लंबे समय से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दों पर मुखर रही हैं। वे बर्मिंघम क्षेत्र से सांसद हैं और पार्टी के भीतर एक प्रभावशाली वक्ता तथा रणनीतिक नेता मानी जाती हैं। उनकी साफ छवि और जमीनी राजनीति उन्हें आम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाती है।
पार्टी के भीतर बढ़ता समर्थन
लेबर पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि मौजूदा हालात में पार्टी को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो विवादों से दूर हो और जनता का भरोसा दोबारा जीत सके। शबाना महमूद की पहचान एक संतुलित, प्रगतिशील और समावेशी नेता के तौर पर है। यदि पार्टी नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में जाती है, तो वे इतिहास रचते हुए ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं।
क्या खतरे में है स्टार्मर की कुर्सी?
हालांकि अभी तक PM कीर स्टार्मर ने इस्तीफे के कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन एपस्टीन फाइल्स विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है। विपक्ष के साथ-साथ मीडिया भी सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह विवाद सिर्फ राजनीतिक दबाव तक सीमित रहता है या ब्रिटेन की सत्ता में वाकई बड़ा बदलाव लाता है।
फिलहाल ब्रिटेन की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां शबाना महमूद का नाम उम्मीद और बदलाव के प्रतीक के रूप में तेजी से उभर रहा है
