नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। Shashi Tharoor ने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में छोटी-मोटी गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। उन्होंने समिट की पहल और आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि भारत को टेक्नोलॉजी और AI के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए ऐसे मंचों की जरूरत है।
थरूर ने अपने बयान में कहा कि किसी भी बड़े कार्यक्रम में व्यवस्थागत चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन उससे पूरे आयोजन के महत्व को कम नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को ग्लोबल AI इकोसिस्टम में मजबूत भागीदारी निभानी चाहिए और ऐसे सम्मेलनों से देश की तकनीकी छवि मजबूत होती है।
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस समिट को लेकर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने इसे “PR तमाशा” बताते हुए कहा कि सरकार को सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट के बजाय जमीनी स्तर पर युवाओं को रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े-बड़े आयोजनों के जरिए अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रही है।
AI समिट में देश-विदेश के टेक विशेषज्ञों, स्टार्टअप फाउंडर्स और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। आयोजन का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करना बताया गया है।
राजनीतिक मतभेदों के बीच यह साफ है कि AI और नई तकनीकों को लेकर देश में गंभीर बहस जारी है—एक तरफ सरकार और कुछ नेता इसे भविष्य की दिशा बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष पारदर्शिता और ठोस नीतिगत परिणामों की मांग कर रहा है।
अब देखना यह होगा कि यह समिट सिर्फ चर्चा तक सीमित रहता है या इससे देश में तकनीकी निवेश, रोजगार और नवाचार को वास्तविक बढ़ावा मिलता है।
