चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्यभर में आयोजित किए जा रहे समाधान शिविरों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। सरकार ने इन शिविरों की निगरानी की जिम्मेदारी PPP (परिवार पहचान पत्र) कोर्डिनेटरों को सौंप दी है। साथ ही सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिविरों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।
PPP कोर्डिनेटर निभाएंगे अहम भूमिका
सरकारी आदेश के अनुसार, प्रत्येक जिले में नियुक्त PPP कोर्डिनेटर समाधान शिविरों में प्राप्त शिकायतों, उनके निस्तारण की स्थिति और लंबित मामलों की रिपोर्ट तैयार करेंगे। वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि आमजन की समस्याओं का समाधान तय समय सीमा के भीतर हो।
सभी शहरों और कस्बों की बनेगी सूची
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी शहरों, कस्बों और ब्लॉकों में लगाए जाने वाले समाधान शिविरों की विस्तृत सूची तैयार की जाए। इस सूची में शिविर की तिथि, स्थान, संबंधित विभाग और नोडल अधिकारी का नाम दर्ज होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता को पहले से जानकारी मिल सके।
DC को सख्त निर्देश
सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को आदेश दिया है कि वे स्वयं समाधान शिविरों की मॉनिटरिंग करें और समय-समय पर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। यदि किसी जिले में शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जनता को मिलेगा त्वरित लाभ
सरकार का कहना है कि समाधान शिविरों का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना है। मॉनिटरिंग व्यवस्था मजबूत होने से शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि शिविरों में आने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और सभी विभागों की समन्वित भागीदारी से कार्य किया जाए, ताकि “समाधान शिविर” वास्तव में जनहित का प्रभावी माध्यम बन सकें।
