नई दिल्ली। देश में रियल एस्टेट सेक्टर को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लागू किया गया Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (RERA) अब खुद सवालों के घेरे में है। हाल ही में Supreme Court of India ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर यह कानून घर खरीदारों को वास्तविक राहत नहीं दे पा रहा और सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डरों को फायदा पहुंचा रहा है, तो इसे बंद कर देना ही बेहतर होगा।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RERA का उद्देश्य था घर खरीदारों को समय पर फ्लैट और न्याय दिलाना, लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि बिल्डर आदेशों का पालन नहीं कर रहे और खरीदार वर्षों तक भटक रहे हैं। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब आदेशों का पालन ही नहीं हो रहा तो ऐसे कानून का क्या फायदा?
घर खरीदारों की परेशानी
देशभर में हजारों प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। खरीदारों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश की, लेकिन न तो उन्हें समय पर घर मिला और न ही पैसा वापस। RERA में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपीलों के कारण राहत मिलने में देरी हो रही है।
बिल्डरों को कैसे मिल रहा फायदा?
कोर्ट की टिप्पणी के मुताबिक, कुछ डिफॉल्टर बिल्डर कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेकर आदेशों को टालते रहते हैं। इससे खरीदारों को समय और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है, जबकि बिल्डर परियोजनाओं में देरी के बावजूद बच निकलते हैं।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है कि RERA को और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि कानून का सही क्रियान्वयन नहीं हुआ तो कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
