अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब अमेरिका किसी भी देश की मदद करने के मूड में नहीं है, खासकर तेल के मुद्दे पर।
उन्होंने कहा, “अगर देशों को तेल चाहिए तो वे अमेरिका से खरीदें, नहीं तो खुद हिम्मत दिखाएं और होर्मुज जाकर ले लें।” ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्र की ओर इशारा करता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।
ट्रंप के इस बयान को अमेरिका की संभावित ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के नए संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अमेरिका अब दूसरे देशों की सुरक्षा या ऊर्जा जरूरतों का बोझ नहीं उठाएगा। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसी नीति लागू होती है, तो तेल सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है। खासकर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
असर क्या होगा?
- तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव
- मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है
- अमेरिका और अन्य देशों के रिश्तों पर असर
- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया पहले से ही ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की नीति किस दिशा में जाती है और इसका वैश्विक असर कितना गहरा होता है।
