चंडीगढ़। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की आज हरियाणा पुलिस के साथ उस समय तीखी झड़प हो गई जब वे मनरेगा योजना में कथित बदलाव के विरोध में विधानसभा का घेराव करने जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी, जिसके बाद मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में किए गए बदलावों से ग्रामीण मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि:
- जॉब कार्ड धारकों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा
- भुगतान में देरी हो रही है
- नई शर्तों से पात्र लाभार्थियों की संख्या कम हो सकती है
इन्हीं मांगों को लेकर पार्टी ने चंडीगढ़ में विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया था।
बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश, पुलिस ने रोका
सुबह से ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता चंडीगढ़ में एकत्र होने लगे। जैसे ही प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई जगह बैरिकेड लगाए। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
कांग्रेस का आरोप, सरकार का बचाव
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों और मजदूरों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है और इसमें किसी भी तरह की कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं सरकारी सूत्रों का कहना है कि योजना में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कुछ प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य लाभार्थियों को बेहतर सुविधा देना है।
आगे क्या?
घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
चंडीगढ़ में हुई इस झड़प ने एक बार फिर मनरेगा के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
