पानीपत (हरियाणा)। पानीपत जिले के नौल्था गांव में मनाई जाने वाली ‘डाट होली’ पूरे प्रदेश में अपनी अनोखी और रोमांचक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां होली के दिन बड़े-बड़े कढ़ाहों में रंग पकाया जाता है और फिर युवक एक-दूसरे को धक्का देते हुए उस रंग में गिराने की कोशिश करते हैं। दूसरी ओर महिलाएं छतों और चौपालों से गर्म रंग फेंककर इस परंपरा को और भी खास बना देती हैं।
कढ़ाहों में पकता है रंग
नौल्था गांव में होली से पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। गांव के चौक में लोहे के विशाल कढ़ाह रखे जाते हैं, जिनमें पानी और प्राकृतिक रंग मिलाकर उसे गर्म किया जाता है। मान्यता है कि यह परंपरा कई सौ साल पुरानी है और गांव की एकता और साहस का प्रतीक मानी जाती है।
धक्का-मुक्की और उत्साह का संगम
होली के दिन गांव के युवक टोली बनाकर मैदान में उतरते हैं। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच वे एक-दूसरे को पकड़कर कढ़ाह के पास ले जाते हैं और रंग में धकेलने की कोशिश करते हैं। इसे ‘डाट’ कहा जाता है। इस दौरान माहौल जोशीला और रोमांचक बना रहता है।
महिलाएं भी इस परंपरा में पीछे नहीं रहतीं। वे छतों से गर्म रंग फेंकती हैं और गीत गाती हैं। पूरे गांव में हंसी-ठिठोली और उल्लास का वातावरण छा जाता है।
हादसों के बाद भी जारी परंपरा
बताया जाता है कि अतीत में इस परंपरा के दौरान कुछ हादसे भी हुए, यहां तक कि जान जाने की घटनाएं भी सामने आईं। बावजूद इसके, गांव वालों ने इस परंपरा को बंद नहीं किया। उनका कहना है कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, जिसे वे हर हाल में निभाते रहेंगे। हालांकि अब सुरक्षा के लिहाज से कुछ सावधानियां भी बरती जाती हैं।
प्रशासन की नजर
हर साल इस आयोजन के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की जाती है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। मेडिकल टीम और पुलिस बल तैनात रहते हैं।
संस्कृति और साहस की मिसाल
नौल्था की डाट होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि गांव की एकजुटता, साहस और परंपरा का प्रतीक बन चुकी है। यहां होली का जश्न देखने के लिए आसपास के इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं।
