नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। इस बार पार्टी वॉकआउट या हंगामे के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के साथ सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस नेतृत्व ने तय किया है कि सदन के भीतर और बाहर ठोस आंकड़ों, आधिकारिक रिपोर्ट्स और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जाएंगे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस बजट सत्र के दौरान पांच प्रमुख मुद्दों पर फोकस करेगी। इनमें महंगाई और बेरोजगारी, किसानों की आय और एमएसपी, सामाजिक कल्याण योजनाओं के बजट में कटौती, संघीय ढांचे से जुड़े सवाल और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता जैसे विषय शामिल हैं। इन मुद्दों पर पार्टी सांसदों को पहले से ब्रीफ किया जाएगा, ताकि बहस के दौरान सरकार को तथ्यों के साथ घेरा जा सके।
रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस की अहम बैठक मंगलवार को दिल्ली में होने जा रही है। इस मंथन बैठक में पार्टी अध्यक्ष, वरिष्ठ नेता, संसदीय दल के सदस्य और विभिन्न राज्यों से जुड़े रणनीतिकार शामिल होंगे। बैठक में यह तय होगा कि किस मुद्दे पर कौन सा नेता बोलेगा और कौन से दस्तावेज सदन में रखे जाएंगे।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि बार-बार वॉकआउट करने से जनता के बीच गलत संदेश जाता है और विपक्ष की भूमिका कमजोर पड़ती है। इसलिए इस बार सरकार को सीधे जवाब देने और उसकी नीतियों की कमियों को उजागर करने पर जोर रहेगा। पार्टी सांसदों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सवालों, शून्यकाल और बहस के दौरान पूरी तैयारी के साथ उतरें।
कुल मिलाकर कांग्रेस बजट सत्र में आक्रामक लेकिन जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने के इरादे से मैदान में उतरेगी, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सके और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाया जा सके।
