मध्य-पूर्व में इस बार ईद का त्योहार असामान्य हालात में मनाया गया। अल-अक्सा मस्जिद को करीब 60 साल में पहली बार ईद के मौके पर बंद रखा गया, जिससे लाखों श्रद्धालु नमाज अदा नहीं कर सके। यह फैसला सुरक्षा कारणों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए लिया गया।
इज़राइल प्रशासन ने यरुशलम के पुराने शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की। मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
वहीं ईरान में भी हालात सामान्य नहीं दिखे। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में बाजार सूने रहे। लोग घरों में ही ईद मनाने को मजबूर दिखे, जिससे त्योहार की रौनक फीकी पड़ गई।
खाड़ी देशों में भी सख्ती देखने को मिली। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत में खुले मैदानों में ईद की नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गई। प्रशासन ने लोगों से मस्जिदों या घरों में ही नमाज पढ़ने की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक और सुरक्षा तनाव के चलते इस तरह के कड़े कदम उठाए गए हैं। हालांकि, आम लोगों के लिए यह ईद पहले की तुलना में काफी अलग और सीमित रही।
👉 कुल मिलाकर, इस बार की ईद परंपराओं से हटकर सख्त सुरक्षा और पाबंदियों के बीच मनाई गई, जिसने लाखों लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया।
