हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल समझौते को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने इस समझौते का विरोध करते हुए इसे हरियाणा के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश के जल अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
INLD नेताओं ने वर्ष 1994 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय यमुना जल विवाद के मुद्दे पर पार्टी के 17 विधायकों ने इस्तीफा दिया था। उनका दावा है कि यह कदम हरियाणा के हितों और राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया था।
पार्टी के वरिष्ठ नेता संपत सिंह ने कहा कि हरियाणा के किसानों और आम जनता के हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पानी की “एक-एक बूंद बचाई जाएगी” और यदि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष भी किया जाएगा। उन्होंने सरकार से राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।
INLD का कहना है कि यमुना जल का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लाखों किसानों, सिंचाई व्यवस्था और भविष्य की जल जरूरतों से जुड़ा विषय है। इसलिए इस पर कोई भी निर्णय सभी पक्षों के हितों और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
फिलहाल यमुना जल समझौते को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। सरकार की ओर से इस विषय पर आधिकारिक रुख का भी इंतजार किया जा रहा है।
