हरियाणा सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की नई फॉर्मूला-आधारित व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य टैक्स निर्धारण को अधिक पारदर्शी बनाना और सभी नगर निकायों में एक समान प्रणाली लागू करना है।
सवाल: नया नियम क्या है?
अब प्रॉपर्टी टैक्स तय करने के लिए एक नई फॉर्मूला-आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे अलग-अलग नगर निकायों में टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया को एकरूप बनाने का प्रयास किया गया है।
सवाल: क्या टैक्स बढ़ेगा?
हर संपत्ति का टैक्स समान रूप से नहीं बढ़ेगा। नई व्यवस्था में टैक्स का निर्धारण संपत्ति के प्रकार, क्षेत्रफल, उपयोग और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर होगा। इसलिए अलग-अलग संपत्तियों पर प्रभाव अलग हो सकता है।
सवाल: छूट कैसे मिलेगी?
सरकार समय-समय पर समय पर टैक्स जमा करने वालों के लिए रिबेट (छूट) की योजना लागू करती है। इसके अलावा, यदि किसी विशेष राहत योजना की घोषणा होती है, तो निर्धारित शर्तें पूरी करने पर उसका लाभ लिया जा सकता है।
सवाल: जुर्माना कब लगेगा?
यदि निर्धारित समय सीमा तक प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं किया जाता, तो बकाया राशि पर नियमानुसार ब्याज या जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए समय पर टैक्स जमा करना जरूरी है।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और नगर निकायों की आय बढ़ने से शहरी विकास कार्यों को गति मिलेगी। वहीं, संपत्ति मालिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने नगर निकाय द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों और भुगतान की अंतिम तिथि पर नजर रखें।
