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चंडीगढ़–पंचकूला रेलवे स्टेशन पर शताब्दी एक्सप्रेस से जुड़े हादसे को लेकर रेलवे प्रशासन की जांच तेज हो गई है। इस मामले में लोको पायलट और ट्रेन गार्ड को जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया है। दोनों ने शुरुआती बयान में स्पष्ट किया है कि ट्रेन को सिग्नल मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया गया था और उनकी ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, हादसे के समय स्टेशन पर मौजूद सिग्नल सिस्टम और कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। लोको पायलट और गार्ड का कहना है कि उन्हें हरी झंडी मिलने के बाद ही ट्रेन चलाने की अनुमति मिली थी, इसलिए किसी तकनीकी खामी या संचार में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सिग्नल लॉग, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान एकत्र किए जा रहे हैं ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल, रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद से रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और सिग्नल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं, जिनका जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
