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पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर लौटे एक पंजाबी युवक ने हिरासत के दौरान झेली गई अमानवीय यातनाओं की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी सुनाई है। युवक के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उससे जबरन कबूलनामे करवाने और भारत के लिए जासूसी स्वीकार कराने के लिए लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी।
उसने बताया कि कई-कई रातों तक उसे बिना आराम दौड़ाया जाता था। ठंड के मौसम में कपड़े उतरवाकर घंटों खुले में बैठाया जाता, जिससे शरीर सुन्न हो जाता। पूछताछ के दौरान लोहे की रॉड से मारपीट की जाती और बिजली के झटकों तक की धमकी दी जाती थी।
पीड़ित के अनुसार, हर पूछताछ का मकसद एक ही था—उसे भारत का जासूस साबित करना। “मैं बार-बार कहता रहा कि मैं एक आम नागरिक हूं, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे,” उसने कहा। परिवार से संपर्क पूरी तरह काट दिया गया था, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया।
भारत लौटने के बाद युवक का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और प्रशासन ने उसके बयान दर्ज किए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाने की मांग की है।
यह आपबीती सीमा पार हिरासत में नागरिकों के साथ होने वाले कथित अत्याचारों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
