तेलंगाना के एक गांव में ‘कुत्ता-मुक्त गांव’ बनाने के नाम पर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां प्रशासन और ग्राम पंचायत की कथित मिलीभगत से करीब 1600 आवारा कुत्तों को मौत के घाट उतार दिया गया। आरोप है कि इसके लिए आंध्र प्रदेश से विशेष डॉगकैचर्स बुलाए गए, जिन्होंने कुत्तों को पकड़कर जहरीले इंजेक्शन लगाए।
स्थानीय लोगों और पशु अधिकार संगठनों के अनुसार, यह अभियान कई दिनों तक गुपचुप तरीके से चलाया गया। कुत्तों को पहले भोजन का लालच देकर इकट्ठा किया गया, फिर उन्हें इंजेक्शन देकर मार दिया गया। कई कुत्तों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जबकि कुछ को मरने के लिए खुले में छोड़ दिया गया।
घटना के सामने आने के बाद पशु प्रेमियों और एनिमल वेलफेयर संगठनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) और टीकाकरण ही अपनाया जा सकता है, न कि सामूहिक हत्या।
आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने नियमों को दरकिनार करते हुए यह कदम उठाया। कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे क्रूरता की पराकाष्ठा बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। वहीं, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद राज्य स्तर पर जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भविष्य में ऐसे और अमानवीय अभियानों को बढ़ावा देगा।
