कन्याकुमारी में मछुआरों के बच्चों ने एक अनोखी पहल कर 48 गांवों को प्लास्टिक मुक्त बना दिया है। कभी इन तटीय इलाकों में लोग सिर्फ मछलियां पकड़ने के लिए आते थे, लेकिन अब यहां साफ-सुथरे बीच और बेहतर व्यवस्थाओं की वजह से रोजाना करीब 300 पर्यटक पहुंच रहे हैं। बच्चों और युवाओं ने मिलकर समुद्र तटों से प्लास्टिक कचरा हटाने, लोगों को जागरूक करने और गांव-गांव अभियान चलाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे यह पहल एक बड़े जनआंदोलन में बदल गई।
स्थानीय मछुआरा परिवारों के बच्चों ने स्कूलों और स्वयंसेवी समूहों के साथ मिलकर नियमित सफाई अभियान चलाया। गांवों में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए बैठकों का आयोजन किया गया और कपड़े व जूट के थैलों का वितरण किया गया। परिणामस्वरूप 48 गांवों में प्लास्टिक का उपयोग लगभग बंद हो गया है। स्वच्छ वातावरण का असर अब पर्यटन पर साफ दिखाई दे रहा है।
युवाओं ने मिलकर 6 समुद्र तटों को पर्यटन के लिए विकसित किया है। यहां बैठने की व्यवस्था, कूड़ेदान, सूचना बोर्ड और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय लोगों की आय में भी इजाफा हुआ है। कई परिवार अब होम-स्टे और छोटे फूड स्टॉल के जरिए अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल की सराहना की है और इसे अन्य तटीय क्षेत्रों में लागू करने की योजना पर काम शुरू किया है। मछुआरों के बच्चों की यह कोशिश न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जागरूकता और सामूहिक प्रयास से बड़ा बदलाव संभव है।
