एक सफाईकर्मी पिता की चिंता ने पूरे शहर को एकजुट कर दिया। आर्थिक तंगी के कारण अपनी दो बेटियों की शादी को लेकर परेशान पिता की स्थिति जब स्थानीय लोगों को पता चली, तो शहरवासियों ने इसे अपनी जिम्मेदारी मान लिया। समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग आगे आए और दोनों बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया।
शादी को यादगार बनाने के लिए करीब 5 हजार निमंत्रण पत्र बांटे गए। शहर के प्रतिष्ठित लोगों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को आमंत्रित किया गया। इतना ही नहीं, वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न कराने के लिए अयोध्या से विशेष रूप से महंत को बुलाया गया, जिनकी मौजूदगी में पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न हुआ।
बारात के स्वागत से लेकर भोजन और सजावट तक की जिम्मेदारी शहरवासियों ने मिलकर निभाई। विवाह स्थल को भव्य तरीके से सजाया गया और मेहमानों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। कन्यादान की रस्म भी समाज के गणमान्य लोगों ने मिलकर निभाई, जिससे यह संदेश गया कि बेटियां केवल एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की होती हैं।
इस आयोजन ने सामाजिक एकता और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की। सफाईकर्मी पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि उनकी बेटियों का विवाह सम्मान और धूमधाम से संपन्न हुआ। शहर में इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही है और लोग इसे सामाजिक सहयोग का प्रेरणादायक उदाहरण बता रहे हैं।
