“मेडिकल जांच करा लें, सही साबित हुए तो शंकराचार्य मान लूंगा”
नई दिल्ली/वाराणसी:
धार्मिक जगत में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। दिव्य लाइट मिशन के प्रमुख आशुतोष महाराज ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि वे मेडिकल जांच कराने को तैयार हो जाएं। अगर जांच में वे पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम साबित होते हैं, तो वे उन्हें शंकराचार्य के रूप में स्वीकार कर लेंगे।
आशुतोष महाराज ने तीखा बयान देते हुए कहा कि धार्मिक पदों पर बैठे लोगों की पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि संत समाज के नाम पर राजनीति और विवाद खड़े किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि धर्मगुरुओं को अपने आचरण और स्थिति को लेकर समाज के सामने स्पष्ट होना चाहिए।
“आसाराम के समर्थक” होने का आरोप
आशुतोष महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती स्वयंभू संतों और विवादित धर्मगुरुओं का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि ऐसे लोगों को जेल में होना चाहिए, न कि समाज का मार्गदर्शन करना चाहिए। यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से उन संतों की ओर इशारा माना जा रहा है जो कानूनी मामलों में घिरे रहे हैं।
विवाद क्यों बढ़ा?
धार्मिक जगत में शंकराचार्य पद को लेकर पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं। विभिन्न पीठों और परंपराओं के बीच मान्यता को लेकर समय-समय पर विवाद होते रहे हैं। इसी क्रम में यह बयानबाजी अब खुली चुनौती में बदल गई है।
समर्थकों की प्रतिक्रिया
दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे धार्मिक गरिमा के खिलाफ बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे पारदर्शिता की मांग के रूप में देख रहा है।
आगे क्या?
अब नजर इस बात पर है कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे मेडिकल जांच की मांग को स्वीकार करेंगे या इसे राजनीतिक बयानबाजी करार देंगे — यह आने वाले दिनों में साफ हो पाएगा।
धार्मिक मंच से उठी यह बहस अब सार्वजनिक विमर्श का विषय बन चुकी है और इसका असर संत समाज की एकजुटता पर भी पड़ सकता है।
