मंडी (हिमाचल प्रदेश)। देवभूमि हिमाचल की ‘छोटी काशी’ के नाम से मशहूर मंडी में इस बार होली का उत्सव तय तारीख से दो दिन पहले ही मनाया गया। चंद्रग्रहण के कारण पारंपरिक तिथि में बदलाव किया गया, जिसके चलते शहर में रंगों का त्योहार पहले ही धूमधाम से शुरू हो गया।
सुबह से ही शहर के चौहट्टा बाजार, सेरी मंच और विभिन्न मोहल्लों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। युवाओं ने डीजे की धुन पर जमकर डांस किया, जबकि बच्चों और महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
मंडी को ‘छोटी काशी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां सैकड़ों प्राचीन मंदिर स्थित हैं। त्योहार के मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि की कामना की और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। रंग, पिचकारियां और मिठाइयों की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
चंद्रग्रहण के कारण इस बार होली का रंग थोड़ा अलग जरूर रहा, लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मंडी की गलियों में देर शाम तक “होली है!” के नारे गूंजते रहे और पूरा शहर रंगों से सराबोर नजर आया।
यह उत्सव एक बार फिर साबित कर गया कि हिमाचल की सांस्कृतिक परंपराएं हर परिस्थिति में पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती हैं।
