पानीपत (हरियाणा): फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर पानीपत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों पुरानी होली की परंपरा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई गई। गांवों में लोगों ने पारंपरिक तरीके से एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
ग्रामीणों ने गांव की 9 ऐतिहासिक चौपालों में जाकर बारी-बारी से रंग लगवाया। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें हर चौपाल पर ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाता है। बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के बाद ही आगे की चौपाल की ओर जुलूस बढ़ता है।
झांकियों ने खींचा आकर्षण
होली के मौके पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक झांकियां निकाली गईं। इनमें भगवान की लीलाओं, लोक संस्कृति और सामाजिक संदेशों को दर्शाया गया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे युवक-युवतियों ने नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को और भी उत्सवमय बना दिया।
साधु-संतों की मौजूदगी
कार्यक्रम में सैकड़ों साधु-संत भी पहुंचे। उन्होंने होली के आध्यात्मिक महत्व पर प्रवचन देते हुए प्रेम, सद्भाव और त्याग का संदेश दिया। ग्रामीणों ने साधु-संतों का सम्मान किया और सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया।
सुरक्षा और व्यवस्था
स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों की धरोहर है, जिसे नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। हर साल होली पर इस आयोजन का इंतजार पूरे क्षेत्र को रहता है, जो आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
