उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक (DGP) ने दहेज उत्पीड़न के मामलों में बड़ा बदलाव करते हुए नया आदेश जारी किया है। अब ऐसे मामलों में सीधे FIR दर्ज नहीं की जाएगी, बल्कि पहले प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) करना अनिवार्य होगा।
यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद लिया गया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में दहेज उत्पीड़न के मामलों में हो रहे कथित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई थी और बिना जांच के तुरंत FIR दर्ज करने पर सवाल उठाए थे।
डीजीपी के आदेश के मुताबिक:
- दहेज उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर पहले जांच की जाएगी
- जांच में आरोप सही पाए जाने पर ही FIR दर्ज होगी
- फिलहाल 31 मामलों में FIR दर्ज करने पर रोक लगाई गई है
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर शिकायत को गंभीरता से लें, लेकिन बिना सत्यापन के किसी के खिलाफ केस दर्ज न करें।
इस फैसले का मकसद एक ओर जहां झूठे मामलों पर रोक लगाना है, वहीं असली पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, इस आदेश को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं—कुछ लोग इसे सही कदम मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे पीड़ित महिलाओं को तुरंत न्याय मिलने में देरी हो सकती है।
अब देखना होगा कि इस नए नियम का जमीनी स्तर पर क्या असर पड़ता है और क्या यह दहेज उत्पीड़न के मामलों में संतुलन बना पाता है।
