भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवाओं पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बिछी अंडरसी (समुद्र के भीतर) केबल्स को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस क्षेत्र में युद्ध या सैन्य कार्रवाई तेज होती है, तो वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
दरअसल, दुनिया भर के लगभग 97% अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रांसफर समुद्र के भीतर बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए होता है। ये केबल्स अलग-अलग महाद्वीपों को जोड़ती हैं और इंटरनेट, बैंकिंग, मोबाइल नेटवर्क, क्लाउड सेवाओं समेत लगभग हर डिजिटल सेवा का आधार हैं।
क्यों है होर्मुज इतना अहम?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों को दुनिया से जोड़ता है। यहां से न सिर्फ तेल की सप्लाई होती है, बल्कि कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं।
क्या हो सकता है असर?
अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा—
- इंटरनेट स्पीड अचानक धीमी हो सकती है
- कई वेबसाइट्स और ऐप्स काम करना बंद कर सकते हैं
- बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं
- एयरलाइन, शिपिंग और स्टॉक मार्केट जैसी सेवाएं बाधित हो सकती हैं
भारत जैसे डिजिटल रूप से तेजी से बढ़ते देश पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय डेटा कनेक्टिविटी पर निर्भर है।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
समुद्री केबल्स को नुकसान पहुंचने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। कभी जहाजों के एंकर, तो कभी प्राकृतिक आपदाएं इन केबल्स को नुकसान पहुंचाती रही हैं। हालांकि, युद्ध जैसी स्थिति में खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्या हैं सुरक्षा उपाय?
टेक कंपनियां और सरकारें बैकअप के तौर पर कई रूट्स और केबल्स का इस्तेमाल करती हैं, ताकि एक केबल खराब होने पर दूसरी से डेटा ट्रांसफर जारी रहे। लेकिन अगर किसी अहम क्षेत्र में कई केबल्स एक साथ प्रभावित होती हैं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
