नई दिल्ली/भिवंडी, 21 फरवरी 2026 — इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक टकराव आज देशभर में नजर आ रहा है। समिट के पांचवें दिन दिल्ली में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने सियासी बयानबाजी को तेज कर दिया और उसके जवाब में भाजपा कार्यकर्ता सड़कों और विभिन्न शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं।
🧑💼 AI समिट में ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन और कांग्रेस की आलोचना
• दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में कुछ भारतीय यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने अपने शर्ट उतारकर और T‑शर्ट पर नारे लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत‑यूएस व्यापार समझौते जैसे मुद्दों पर आपत्ति जताई। पुलिस ने लगभग 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
• प्रदर्शनकारियों ने “PM is compromised”, “India‑US Trade Deal” जैसे नारे भी लगाए, जिससे मंच के अंदर कुछ देर के लिए हलचल और गर्मजोशी देखी गई।
• कांग्रेस और युवाओं के अनुसार यह विरोध देश की नीतियों और चुने हुए समझौतों के प्रति असहमति का अभिव्यक्ति था। वहीं भाजपा ने इसे “देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला” और विरोध का गलत मंच बताया।
📍 भिवंडी में राहुल गांधी को काले झंडे दिखाए गए
• आज शनिवार को भिवंडी (महाराष्ट्र) में जब कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मानहानि मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट जा रहे थे, वहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए और नारेबाजी की। यह विरोध मुख्य रूप से दिल्ली में AI समिट को लेकर हुए यूथ कांग्रेस के विरोध को लेकर था।
📌 दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर राजनीति गर्म
• AI समिट में विवाद और भिवंडी की घटना के बीच दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय और राहुल गांधी के आवास के बाहर भी भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके सहयोगियों द्वारा विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। इससे राजनीतिक तनाव और दैनिक टिप्पणी का स्तर बढ़ गया है।
🔥 राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और आरोप‑प्रत्यारोप
• भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के विरोध को प्रदर्शन से आगे बढ़कर देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली हरकत बताया है, जबकि कांग्रेस इसे सरकारी नीतियों और व्यापार समझौतों के खिलाफ लोकतांत्रिक आवाज़ का हिस्सा मान रही है।
• कुछ भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी पर AI समिट को बदनाम करने की साजिश का आरोप भी लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इसे विपक्ष के विरोध के अधिकार के रूप में पेश किया है।
