लखनऊ: ASI और होमगार्ड की हत्या के मामले में पुलिस एनकाउंटर को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग हर एनकाउंटर की कहानी एक जैसी क्यों होती है। कोर्ट ने कहा कि मारे गए युवक रणजीत की उम्र महज 18-19 साल थी और न्यायालय आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश के DGP से पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने कहा कि पुलिस एनकाउंटर की घटनाओं में अक्सर एक ही तरह की कहानी सामने आती है—आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि अगर किसी युवक की मौत पुलिस कार्रवाई में होती है तो यह गंभीर मामला है और इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। अदालत ने पुलिस से पूछा कि आखिर हर बार घटनाक्रम लगभग एक जैसा कैसे हो जाता है।
बताया जा रहा है कि ASI और होमगार्ड की हत्या के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी रणजीत को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। पुलिस का कहना था कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई।
हालांकि इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अब अदालत ने प्रदेश के DGP को निर्देश दिया है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के राज में हर घटना की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था का कर्तव्य है कि किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत की सच्चाई सामने लाई जाए।
अब इस मामले में अगली सुनवाई पर अदालत पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार करेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
