लखनऊ/कानपुर: अब रसोई गैस (LPG) का विकल्प तेजी से सामने आ रहा है। उत्तर प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद सरकार और कंपनियां इसे घरेलू ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। आने वाले समय में रसोई में LPG की जगह एथेनॉल से खाना पकाना आम हो सकता है।
यूपी बना एथेनॉल उत्पादन में नंबर-1
उत्तर प्रदेश देश में एथेनॉल उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। गन्ना और चीनी मिलों की अधिकता के कारण यहां बड़े स्तर पर एथेनॉल तैयार किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि पेट्रोल के साथ-साथ घरेलू उपयोग में भी एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।
कैसे काम करता है एथेनॉल स्टोव?
एथेनॉल से चलने वाला स्टोव LPG स्टोव से थोड़ा अलग होता है:
- इसमें लिक्विड एथेनॉल का उपयोग होता है, गैस सिलेंडर की जरूरत नहीं होती
- स्टोव में एक विशेष बर्नर और कंट्रोल सिस्टम होता है
- आग नीली और साफ जलती है, जिससे धुआं नहीं निकलता
- इसे जलाने के लिए माचिस या इग्निशन सिस्टम दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है
LPG vs एथेनॉल स्टोव: क्या है अंतर?
| फीचर | LPG स्टोव | एथेनॉल स्टोव |
|---|---|---|
| ईंधन | गैस (सिलेंडर) | तरल एथेनॉल |
| धुआं | कम | लगभग शून्य |
| सुरक्षा | सिलेंडर लीक का खतरा | कम रिस्क |
| पोर्टेबिलिटी | भारी | हल्का और आसान |
| कीमत | बढ़ती रहती है | सस्ता होने की संभावना |
🔒 कितना सुरक्षित है एथेनॉल?
एथेनॉल स्टोव को काफी सुरक्षित माना जा रहा है क्योंकि:
- इसमें गैस लीक का खतरा नहीं होता
- आग नियंत्रित रहती है
- पर्यावरण के लिए भी यह ग्रीन फ्यूल है
हालांकि, इसे इस्तेमाल करते समय सही स्टोरेज और सावधानी जरूरी है क्योंकि यह ज्वलनशील तरल होता है।
💰 कितना सस्ता पड़ेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- एथेनॉल की कीमत LPG से कम हो सकती है
- ग्रामीण और छोटे शहरों में यह एक किफायती विकल्प बन सकता है
- सरकार सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है
🌍 पर्यावरण के लिए बड़ा फायदा
एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जो गन्ने जैसी फसलों से बनता है। इससे:
- कार्बन उत्सर्जन कम होता है
- प्रदूषण घटता है
- किसानों की आय बढ़ती है
📊 भविष्य क्या कहता है?
भारत सरकार एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। आने वाले 3–5 साल में एथेनॉल स्टोव आम घरों तक पहुंच सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।
