बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए ने “5-0” का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। सूत्रों के अनुसार, सत्ताधारी गठबंधन सभी सीटों पर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस फॉर्मूले में सामाजिक संतुलन, सहयोगी दलों की हिस्सेदारी और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखा गया है।
सबसे पहले बात करें रामनाथ ठाकुर की, तो उनका राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। वे पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के बड़े चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं। उनके नाम से एनडीए को सामाजिक समीकरण साधने में मदद मिल सकती है।
वहीं उपेंद्र कुशवाहा और मौजूदा उपसभापति हरिवंश के नामों को लेकर संशय बना हुआ है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। अगर समीकरण बदले तो इनमें से किसी एक का पत्ता कट सकता है।
इधर, नौकरशाह से नेता बने मनीष वर्मा को दिल्ली भेजे जाने की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव के चलते उन्हें राज्यसभा के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे भाजपा को शहरी और प्रशासनिक वर्ग में मजबूत संदेश देने का मौका मिलेगा।
एनडीए के इस “5-0 प्लान” के तहत भाजपा अपने कोर वोट बैंक के साथ-साथ अति पिछड़ा, कुशवाहा और अन्य प्रभावशाली सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश कर रही है। सहयोगी दलों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जा रहा है ताकि गठबंधन में असंतोष न उभरे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यह फॉर्मूला सफल रहता है तो एनडीए राज्यसभा में अपनी ताकत और मजबूत कर सकता है। अब सबकी नजर अंतिम सूची पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में साफ हो जाएगी।
