बिहार में एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद कोचिंग हब में चल रहे गर्ल्स हॉस्टलों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक भास्कर की स्टिंग जांच में सामने आया है कि कई गर्ल्स हॉस्टल बिना वैध रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है। DM कार्यालय से लेकर नगर निगम तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला कि आखिर कितने हॉस्टल अधिकृत हैं और कितने अवैध रूप से चल रहे हैं।
मामले में “शंभू गर्ल्स हॉस्टल” का नाम भी सामने आया है, जहां कथित तौर पर बिना जरूरी दस्तावेजों और सुरक्षा इंतजामों के छात्राएं रह रही थीं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई हॉस्टलों में अग्निशमन प्रमाणपत्र, भवन सुरक्षा अनुमति और छात्रावास लाइसेंस तक उपलब्ध नहीं हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि मोटी फीस वसूलने के बावजूद छात्राओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि सभी कोचिंग क्षेत्रों में चल रहे हॉस्टलों की सूची तैयार कर सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। यदि कोई हॉस्टल बिना रजिस्ट्रेशन या नियमों के उल्लंघन में पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त गाइडलाइन लागू की जाएं, नियमित निरीक्षण हो और हेल्पलाइन व्यवस्था मजबूत की जाए। फिलहाल यह मामला शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
