पूरी खबर:
हाल ही में सार्वजनिक हुईं तथाकथित एपस्टीन फाइल्स में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का नाम 157 बार दर्ज होने का दावा सामने आया है। इन दस्तावेज़ों में कई वैश्विक हस्तियों, राजनेताओं और सामाजिक व्यक्तित्वों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी नाम का दस्तावेज़ों में उल्लेख होना अपने-आप में किसी भी प्रकार के अपराध या अनैतिक गतिविधि में संलिप्तता का प्रमाण नहीं होता।
सूत्रों के मुताबिक, एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों में कई बार नाम संदर्भ, संपर्क सूची, यात्रा या तीसरे पक्ष के उल्लेख के रूप में आते हैं। दलाई लामा से जुड़े उल्लेखों को लेकर अब तक कोई ठोस आरोप, शिकायत या कानूनी कार्रवाई सामने नहीं आई है। तिब्बती आध्यात्मिक नेता के कार्यालय से जुड़े लोगों ने भी स्पष्ट किया है कि दलाई लामा का नाम किसी गलत गतिविधि से जोड़ने का कोई आधार नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन फाइल्स में नामों का होना अक्सर संदर्भात्मक होता है और इन्हें जांच के बिना निष्कर्ष के तौर पर पेश करना भ्रामक हो सकता है। कई मामलों में ऐसे दस्तावेज़ गवाहों के बयान, ईमेल संदर्भ या अप्रत्यक्ष उल्लेखों पर आधारित होते हैं, जिनका सत्यापन आवश्यक होता है।
दलाई लामा को दुनिया भर में शांति, अहिंसा और करुणा के संदेश के लिए जाना जाता है। अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ किसी भी तरह का आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। विशेषज्ञों ने मीडिया और जनता से अपील की है कि वे तथ्यों की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें और आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण का इंतजार करें।
