तेहरान: ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन के लगभग दो सप्ताह बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इस फैसले के बाद ईरान और दुनिया भर में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद देश का सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। यह पद सेना, न्यायपालिका और सरकार के कई अहम फैसलों पर अंतिम अधिकार रखता है। अली खामेनेई 1989 से इस पद पर बने हुए थे और उनके निधन के बाद नए नेता के चयन को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी।
सूत्रों के अनुसार, ईरान की सर्वोच्च धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने बैठक के बाद मुजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति जताई। मुजतबा लंबे समय से ईरान की सत्ता और धार्मिक व्यवस्था में प्रभावशाली माने जाते रहे हैं और अपने पिता के करीबी सहयोगी भी रहे हैं।
इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले बयान देते हुए कहा था कि ईरान को नए सुप्रीम लीडर के चयन में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि “मेरे बिना सुप्रीम लीडर का फैसला न किया जाए”, हालांकि इस बयान को कई विश्लेषकों ने राजनीतिक टिप्पणी बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने से ईरान की नीतियों में बहुत बड़ा बदलाव शायद न आए, क्योंकि वह अपने पिता की विचारधारा के काफी करीब माने जाते हैं।
हालांकि, कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे ईरान में सत्ता के परिवार के भीतर केंद्रित होने का संकेत भी बता रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में ईरान की घरेलू और विदेश नीति किस दिशा में जाती है।
