नई दिल्ली। राजधानी में हुए चर्चित दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस साजिश के पीछे शिक्षित और पेशेवर लोगों का एक समूह सक्रिय था, जिसने खुद को ‘अंसार अंतरिम’ नामक संगठन के रूप में संगठित किया था। बताया जा रहा है कि इस मॉड्यूल में कुछ डॉक्टर भी शामिल थे, जिन्होंने साल 2016 के आसपास कट्टरपंथी विचारधारा अपनाई और धीरे-धीरे एक गुप्त नेटवर्क तैयार किया।
सूत्रों के अनुसार, यह तथाकथित “वाइट कॉलर मॉड्यूल” इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि इसके सदस्य उच्च शिक्षित और समाज में सम्मानित पेशों से जुड़े थे। जांच में सामने आया है कि संगठन का उद्देश्य राजधानी में बड़े स्तर पर हमला कर दहशत फैलाना था। एजेंसियों को डिजिटल सबूत, संदिग्ध चैट और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच जारी है।
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 2016 के बाद से इस समूह ने गुप्त बैठकों, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए अपने नेटवर्क को मजबूत किया। शुरुआती चरण में यह संगठन वैचारिक प्रचार और युवाओं को प्रभावित करने का काम करता था, लेकिन बाद में इसकी गतिविधियां संदिग्ध होती गईं। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि कुछ विदेशी संपर्क भी स्थापित किए गए थे।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अन्य केंद्रीय एजेंसियां मामले की संयुक्त जांच कर रही हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है और कुछ को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को भी राजधानी में और सख्त कर दिया गया है, खासकर संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस तरह के ‘वाइट कॉलर’ मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं, क्योंकि ये लोग सामान्य जीवन जीते हुए अंदर ही अंदर साजिश रचते हैं। फिलहाल एजेंसियां संगठन के पूरे नेटवर्क और फंडिंग स्रोतों का पता लगाने में जुटी हैं। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
