लखनऊ / नई दिल्ली, 13 मार्च 2026 — कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi की विदेश नीति विशेष रूप से भारत‑अमेरिका संबंधों और हालिया व्यापार समझौते को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि भारत के राष्ट्रीय हितों के प्रति मोदी सरकार की रणनीति संतोषजनक नहीं है और इससे भारत की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
राहुल गांधी के आरोपों का मुख्य सार इस प्रकार है:
- उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यूएस‑भारत व्यापार समझौते में भारत को असमान शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर किया है, जिसे उन्होंने “सरेंडर जैसा” बताया है।
- राहुल ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और डेटा‑संबंधित स्वायत्तता को इस समझौते से कमज़ोर किया जा रहा है और इससे अमेरिकी दबाव बढ़ रहा है।
- उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की विदेश नीति में दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति स्पष्टता नहीं है।
हालाँकि विपक्षी नेता की इन टिप्पणियों को कुछ मीडिया एवं राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा ‘आक्रामक भाषा’ के रूप में देखा गया, कोई प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी या मुख्यधारा समाचार वेबसाइट ने यह रिपोर्ट नहीं किया है कि राहुल गांधी ने कहा हो कि “मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं हैं” या वह साइकोलॉजिकली खत्म हो चुके हैं।
- संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने संसद की कार्यवाही से खुद को अलग रखा और विपक्षी आवाज़ों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
- इसी तनाव के बीच राहुल ने पीएम पर “देश को अमेरिका के आगे बेचने” जैसे आरोप भी लगाए हैं, जो कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
बीजेपी नेताओं ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि राहुल गांधी की टिप्पणियाँ राजनीतिक रूप से भड़काऊ हैं और देशहित के प्रति जिम्मेदार बयान नहीं हैं।
