नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma से जुड़े कथित “शूटिंग वीडियो” मामले में दायर याचिका पर Supreme Court of India ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाना एक ट्रेंड बनता जा रहा है। न्यायालय कोई “प्लेग्राउंड” नहीं है, जहां राजनीतिक मुद्दों को चुनाव से पहले हवा देने के लिए लाया जाए।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित शूटिंग वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए और इस मामले में न्यायालय हस्तक्षेप करे। याचिका में चुनावी माहौल का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की याचिकाएं दायर करना उचित परंपरा नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को शिकायत है तो वह संबंधित संवैधानिक अथवा वैधानिक मंच का रुख करे। हर राजनीतिक विवाद को सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
कोर्ट के इनकार के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस मुद्दे पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि अदालत की टिप्पणी से साफ है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित था।
आगे क्या?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि याचिकाकर्ता के पास ठोस साक्ष्य हैं तो वे निचली अदालत या सक्षम जांच एजेंसी के समक्ष जा सकते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में तत्काल कोई न्यायिक कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
इस फैसले ने एक बार फिर चुनावी मौसम में दाखिल की जाने वाली याचिकाओं और न्यायपालिका की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।
